क्या है रानी पद्मिनी और रतनसिंह की प्रेम कथा।

सिंहल द्वीप (श्रीलंका) का राजा गंधर्वसेन था, जिसकी कन्या पदमावती थी, जो पद्मिनी थी। उसने एक सुग्गा पाल रखा था, जिसका नाम हीरामन था। एक दिन पदमावती की अनुपस्थिति में बिल्ली के आक्रमण से बचकर वह सुग्गा भाग निकला और एक बहिलिए के द्वारा फँसा लिया गया। उस बहेलिए से उसे एक ब्राह्मण ने मोल ले लिया, जिसने चित्तौड़ आकर उसे वहाँ के राजा रतनसिंह राजपूत के हाथ बेच दिया। इसी सुग्गे से राजा ने पद्मिनी (पदमावती) के अद्भुत सौंदर्य का वर्णन सुना, तो उसे प्राप्त करन के लिये योगी बनकर निकल पड़ा।

अनेक वनों और समुद्रों को पार करके वह सिंहल पहुँचा। उसके साथ में वह सुग्गा भी था। सुग्गे के द्वारा उसने पदमावती के पास अपना प्रेमसंदेश भेजा। पदमावती जब उससे मिलने के लिये एक देवालय में आई, उसको देखकर वह मूर्छित हो गया और पदमावती उसको अचेत छोड़कर चली गई। चेत में आने पर रतनसेन बहुत दु:खी हुआ। जाते समय पदमावती ने उसके हृदय पर चंदन से यह लिख दिया था कि उसे वह तब पा सकेगा जब वह सात आकाशों (जैसे ऊँचे) सिंहलगढ़ पर चढ़कर आएगा। अत: उसने सुग्गे के बताए हुए गुप्त मार्ग से सिंहलगढ़ के भीतर प्रवेश किया। राजा को जब यह सूचना मिली तो उसने रतनसेन को शूली देने का आदेश दिया किंतु जब हीरामन से रतनसिंह राजपूत के बारे में उसे यथार्थ तथ्य ज्ञात हुआ, उसने पदमावती का विवाह उसके साथ कर दिया।

रतनसिंह राजपूत पहले से भी विवाहित था और उसकी उस विवाहिता रानी का नाम नागमती था। रतनसेन के विरह में उसने बारह महीने कष्ट झेल कर किसी प्रकार एक पक्षी के द्वारा अपनी विरहगाथा रतनसिंह राजपूत के पास भिजवाई और इस विरहगाथा से द्रवित होकर रतनसिंह पदमावती को लेकर चित्तौड़ लौट आया।

यहाँ, उसकी सभा में राघव नाम का एक पंडित था, जो असत्य भाषण के कारण रतनसिंह द्वारा निष्कासित होकर तत्कालीन सुल्तान अलाउद्दीन की सेवा में जा पहुँचा और जिसने उससे पदमावती के सौंदर्य की बड़ी प्रशंसा की। अलाउद्दीन पदमावती के अद्भुत सौंदर्य का वर्णन सुनकर उसको प्राप्त करने के लिये लालायित हो उठा और उसने इसी उद्देश्य से चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया। दीर्घ काल तक उसने चित्तौड़ पर घेरा डाल रखा, किंतु कोई सफलता होती उसे न दिखाई पड़ी, इसलिये उसने धोखे से रतनसिंह राजपूत को बंदी करने का उपाय किया। उसने उसके पास संधि का संदेश भेजा, जिसे रतन सिंह राजपूत ने स्वीकार कर अलाउद्दीन को विदा करने के लिये गढ़ के बाहर निकला, अलाउद्दीन ने उसे बंदी कर दिल्ली की ओर प्रस्थान कर दिया।
चित्तौड़ में पदमावती अत्यंत दु:खी हुई और अपने पति को मुक्त कराने के लिये वह अपने सामंतों गोरा तथा बादल के घर गई। गोरा बादल ने रतनसिह राजपूत को मुक्त कराने का बीड़ा लिया। उन्होंने सोलह सौ डोलियाँ सजाईं जिनके भीतर राजपूत सैनिकों को रखा और दिल्ली की ओर चल पड़े। वहाँ पहुँचकर उन्होंने यह कहलाया कि पद्मावती अपनी चेरियों के साथ सुल्तान की सेवा में आई है और अंतिम बार अपने पति रतनसेन से मिलने के लिय आज्ञा चाहती है। सुल्तान ने आज्ञा दे दी। डोलियों में बैठे हुए राजपूतों ने रतनसिंह राजपूत को बेड़ियों से मुक्त किया और वे उसे लेकर निकल भागे। सुल्तानी सेना ने उनका पीछा किया, किंतु रतन सिंह राजपूत सुरक्षित रूप में चित्तौड़ पहुँच ही गया।
जिस समय वह दिल्ली में बंदी था, कुंभलनेर के राजा देवपाल ने पदमावती के पास एक दूत भेजकर उससे प्रेमप्रस्ताव किया था। रतन सिंह राजपूत से मिलने पर जब पदमावती ने उसे यह घटना सुनाई, वह चित्तौड़ से निकल पड़ा और कुंभलनेर जा पहुँचा। वहाँ उसने देवपाल को द्वंद्व युद्ध के लिए ललकारा। उस युद्ध में वह देवपाल की सेल से बुरी तरह आहत हुआ और यद्यपि वह उसको मारकर चित्तौड़ लौटा किंतु देवपाल की सेल के घाव से घर पहुँचते ही मृत्यु को प्राप्त हुआ। पदमावती और नागमती ने उसके शव के साथ चितारोहण किया। अलाउद्दीन भी रतनसिंह राजपूत का पीछा करता हुआ चित्तौड़ पहुँचा, किंतु उसे पदमावती न मिलकर उसकी चिता की राख ही मिली।

इस तरह रानी पद्मिनी अपने सम्मान और गोरव् की रक्षा के लिए इतिहास में अमर हो गयी। 

#पदमावत- मलिक मोहमद जायसी

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राजस्थान के जहरीले सांप

                                     जोगराज सिंह भाटी

सांपो का संसार भी बड़ा विचित्र हे परंतु वह मनुष्यों द्वारा हमेशा उपेक्षित रहे हे । हम सांप को देखते ही मार देना चाहते है । हमारी धारणा सांपो के प्रति ऐसी बन गयी है कि वे हमें हमारे जानी दुश्मन लगते है । प्रकृति ने सभी को जीवित रहने के लिए कुछ ना कुछ विशेषता दी है जिससे वे जीवित रह पाए।। मनुस्य को प्रखर बुद्धि , हाथ , पैर दिए है जिससे हम अपना जीविकापार्जन कर सके लेकिन जरा सोचिए सांपो के पास ना तो पैर हे ना ही हाथ तो उनके जीवित रहने व भोजन करने हेतु प्रकृति ने उसे दिया है जहर।जो भी कुछ सांपो के पास ही होता है अधिकतर सांप विषहीन होते है ।।    इसीलिए अनावश्यक उन्हें ना मारे क्योंकि उनको भी जीवित रहने का उतना ही अधिकार है जितना आपको।

यहां में आपको राजस्थान में पाए जाने वाले मुख्य विषधर सांपो का संक्षिप्त विवरण दे रहा हु जो हर व्यक्ति को पता होना चाहिए ।

1. कोबरा (काला नाग) naja naja

इस इस सांप को पूजनीय सांप माना जाता है । यह बहुत जहरीला सांप हे इसकी लंबाई  लगभग 1.5m हो सकती हे ।इसमें फन होता है इसके पीछे सिक्के जैसे दो निशान होते है । युवावस्था में यह अधिक फुर्तीला एवं आक्रामक होता है । छेड़ने पर फुंकार के साथ शरीर के 1/3 भाग पर खड़े होकर हमला करते हे । यह सर्प छेड़ने पर ही काटते हे अन्यथा अपने रास्ते जाना पसंद करते हे ।यह चूहों की तलाश में खेत या मनुष्य बस्ती तक आ जाते हे । यह दोपहर बाद ही सक्रिय होते है जो रात तक रहते है ।।           

 भारतीय नाग में सिनेप्टिक न्यूरोटॉक्सिन (सिनेप्टिक neurotoxin) और कार्डिओटोक्सिन (cardiotoxin) नामक घातक विष होता है  ।।इनके काटने पर मस्तिक की सक्रियता समाप्त हो जाती है रक्त का थक्का नही बनता और धड़कन रुकने से मृत्यु हो जाती हे । 

2. सॉ स्केल्ड वाईपर – ( बाँडी )

राजस्थान में यह अधिकतर पाया जाता है  जो जहरीला सांप हे और सबसे खतरनाक भी क्योंकि यह बिना छेड़े भी काट लेता है । इंसानो को इससे बचकर रहना चाहिए  ।इसकी पहचान करना भी थोड़ा कठिन है  , यह लगभग ओसतन 30 cm का होता है और अधिकतम 90 cm का।  इसका आकार वंहा के स्थान पर निर्भर करता है  ।।   पूंछ ऐसी होती है जैसे किसी ने काट ली हो इसीलिए इसे बाँडी कहते हे।        इसका रंग कभी चमकीला और कही कही भूरा भी होता है ।जिसका सिर तिकोना और जिसकी सफेद रंग की भूरी पृष्ठभूमि पर एक तीर का निशान बना रहता है। शरीर धूसरपन लिए हुए भूरा और उसपर पीले चिह्नों की एक शृंखला होती है। उक्त शृंखला देह के ऊपर एक वक्र बनाती है।  इसकी त्वचा खुरदरी होती है । छूने पर आरी के समान प्रतीत होती है । इससे दूर रहने का प्रयास करे क्योंकि पास में 90% यह काटेगा ही।। 

इसके काटते ही जिस हिस्से में इसने काटा है वहां तेजी से खून बहना शुरू हो जाता है। पूरे बदन में जानलेवा दर्द शुरू हो जाता है। मसूड़ो से खून निकलना शुरू हो जाता है। ब्लडप्रेशर में तेजी से गिरावट आती है आदमी कई बार खून की उल्टियां करता है

3. क्रैत ( पीवणा ) – 

यह सांप सबसे चर्चित सांप हे क्योंकि इसको लेकर कई भ्रांतिया भी प्रचलित है । इसकी लंबाई औसतन 90 से 120 cm तक होती है । और यह अधिकतर रात को ही निकलता है । इसीलिए इसे बहुत कम लोगो ने देखा है और यह प्रायः इंसानी बस्तियों से दूर ही रहता है । इसे मनुस्य के शरीर की गंध अच्छी लगती हे तो वह सूँघता सूँघता आ जाता है और गर्मी लेने हेतु मनुष्य के साथ लेट जाता है । करवट बदलने पर या छूने पर यह डरकर काटता है और चला जाता है । इसके दांत बहुत छोटे होते हे इसीलिए किसी भी प्रकार का निशान नही होता है । इसके काटने के कारण रक्त वाहनियों में छेद हो जाते हे रक्त बाहर बहने लगता है कुछ घण्टो में मुंह में छाले हो जाते हे और सूर्योदय होते ही वो फट जाते हे जिसके कारण मनुष्य की मृत्यु हो जाती है । इसीलिए यह धारणा बन गयी कि यह मुंह में थूक के जाता है , साँस खिंच लेता है बगैरा बगैरा। जो महज भ्रांतिया ही हे ।।

4. रसल वाईपर – परड़

रसेल वाईपर को भारत में “कोरिवाला” के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि यह करैत से कम जहरीला है फिर भी यह सांप भारत का सबसे घातक सांप है। यह बेहद गुस्सैल स्वभाव का सांप है और बिजली की तेज़ी से हमला करने में सक्षम है। इसके काटने की वजह से भारत में हर साल लगभग 25,000 लोगों की मौत हो जाती है।। इसके काटने पर शरीर में छाले होने लगते है और शरीर के विभिन्न भागो से खून व पानी निकलना शुरू हो जाता है, इसमे हिमोटॉक्सिक नामक विष पाया जाता है जो शरीर के तन्त्रिका तन्त्र को ख़त्म करता है व 4 से 5 दिन में मृत्यु संभव है।।  रसेल वाइपर को बाड़मेर व् जैसलमेर में पर्ड भी कहते हैं।यह भूरे रंग का सांप होता है और उस पर काले रंग के गोल धब्बे होते हैं। इसके फुंफकारने की आवाज काफी तेज होती है, जिसे दस से बीस फीट दूर से सुना जा सकता है।

बिना जहर वाले सांप –

1.ग्लॉसी बेलिएड रेसर (गोरावा )   2.रेड सेंड बोआ (बॉगी )  3.रसेल सेंड बोआ (ये भी बोगी की ही प्रजाति हे )      4.लीथ सेंड स्नेक (तन्न )        5.ब्लाइंड स्नेक (अँधा साँप )  6.रॉयल स्नेक                     7.कैट स्नेक  

ये साँप मुख्य रूप से बाडमेर और जैसलमेर में अधिक है।इनके बारे में जल्द पोस्ट करूँगा।।

पहचान कैसे करे-
वेसे तो आपको हर प्रकार के सांप से दूर रहना है पर किसी को काट ले तो पहचान करने के लिए ध्यान देवे – सांप की पहचान हो सके तो कर ले क्योंकि जहरीले सांपो का विवरण मेने ऊपर दिया है साथ ही चित्र भी दिए है । यह संभव ना हो तो जो जहरीला सांप हे वो जहाँ काटेगा  वंहा 2 काले काले निशान होंगे ।। 

सांप रेस्क्यू– घर में यदि सांप निकल आया है तो जरुरी नही है उसे मारा जाये। प्रायः हम उसको मार देते हे । मारने की बजाय किसी स्नेक कैचर को फ़ोन करे अन्यथा वन विभाग को सूचित करे । यदि यह दोनों संभव ना हो तो आप खुद भी कोसिस कर सकते हे पर ध्यान इससे आपको 1 % भी खतरा होने की संभावना ना हो अन्यथा सेल्फ डिफेन्स में आप मार भी सकते हे पर मानवता के नाते बचाने का प्रयास करे। 

स्नेक sticks- इसका उपयोग कर सांप पकड़ें । 

यह भी उपलब्ध ना हो तो कोई डिब्बा या मजबूत प्लास्टिक पैकेट (बोरी,कट्टा)  लेवे और उसके आगे पाइप लगा कर कोसिस करे सांप उसे बिल समझ अंदर घुसेगा तत्पश्चात उसे बंद कर दे। उसके बाद जंगल में जाके छोड़ देवे। इस प्रक्रिया में समय और मेहनत जरूर ज्यादा लगती है । 

About writter- 

जोगराज सिंह भाटी।                                                   निवासी सिहडार जिला जैसलमेर  ।। वर्तमान में वन विभाग जैसलमेर में वनरक्षक के पद पर कार्यरत

Mo-8890023265 Jograjbhati2012@gmail.com

​क्या है करनी सेना पर किये गए आज तक खुलासे का सच

फिल्म पद्मावती आज फिर सुर्खियों में हे आज तक ने बड़ा खुलासा किया है कि करनी सेना ने यह सब पेसो के लिये पब्लिसिटी स्टंट किया था। 

क्या है पूरा सच – करनी सेना अध्यक्ष के अनुसार वे लोग उनसे जरूर मिले थे पर वो फिल्म ओरंगजेब की शूटिंग के लिए सुरक्षा गार्ड की डील के लिए मिले थे । वे ओरंगजेब पर फिल्म बनाना चाहते है और उसके विरोध की आशंका के चलते उन्हें 50 सुरक्षा गार्ड व 150 बाउंसर चाहिए थे जिसकी कीमत 1.5 करोड़ तय हुई थी। जिसके लिए उन्होंने उम्मेदसिंह से मिलने हेतु कहा था । 

करनी सेना के इस बयान के बाद यदि आज तक के खुलासा वीडियो को वापस देखे तो कुछ हद तक यह सच साबित होता है क्योंकि वंहा बाउंसर की बात हो रही है फिल्म पद्मावती की शूटिंग हो चुकी है इसीलिए उन्हें बाउंसर चाहिये नही । 

करनी सेना का कहना है कि राजस्थान सरकार ने उन्हें स्क्रीनिंग के बाद फिल्म रिलीज करने का भरोसा दिलाया पर वे बाकि राज्यो में इसका विरोध अभी भी करते रहेंगे। 

आज तक व इंडिया टूडे पर करेंगे मान हानि का दावा- 

करनी सेना अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने कहा है कि वह आज तक पर मान हानि का दावा करने जा रहे हे साथ ही उन्होंने आज तक से इसके पुरे वीडियो दिखाने का भी अनुरोध किया है । क्योंकि उनका कहना है कि चैनल ने एडिटिंग करके भ्रमित करने का प्रयास किया है । उनका यह भी कहना है कि भंसाली के आज तक में शेयर हे तथा आज तक फिल्म पद्मावती का मीडिया पार्टनर हे ।

बैंक खातों से पैसे निकालने की ठगी का आधार बना आधार कार्ड 

Jograj Singh Bhati

​बैंक खाते से पैसे निकालने की ठगी का आधार बना आधार कार्ड

बैंक की और से फर्जी कर्मचारी बन पैसे उड़ाने की खबरें निरंतर आती रही है जिसमे हजारो ग्राहक शिकार भी बने हे । इसमें ज्यादातर ग्रामीण लोग होते है क्योंकि उनको बैंक की कार्यशैली और गोपनीयता की पूर्ण जानकारी नहीं होती वे इनको वास्तविक बैंक कर्मी मानकर अपनी संपूर्ण गोपनीय जानकारी दे देते हे। लेकिन ठगी करने का यह आईडिया अब काम नही करते देख ठगों से अब नया तरीका अपनाया है । 

आधार कार्ड वेरिफिकेशन कॉल से ठगी-

आजकल आपको एक आधारकार्ड वेरिफिकेशन कॉल आ सकता है । जो आपको मोबाइल सिम कंपनी का कर्मचारी बन किया जायेगा जिसमे कहा जायेगा की आपका आधार कार्ड सिमकार्ड से लिंक करना अनिवार्य हे वरना आपका सिम कार्ड बंद हो जायेगा। जिसमे आपको आधार नंबर डायल करने को कहा जायेगा। वर्तमान में सभी बैंकों ने अपने ग्राहकों के सभी बैंक खातों से आधार कार्ड लिंक कर दिया है । वे आधार नंबर से आपका खाता नंबर निकाल आपसे otp नंबर पूछेगा । otp नंबर देने पर कॉल स्वतः कट जायेगा और आपके खाते से समस्त राशि निकल दी जायेगी। 

किसी को अपनी बैंक detail या आधार नंबर ,otp ना देवे- 

ध्यान रखे कोई भी सिम कंपनी आपसे आधार नंबर नही पूछेगी । वर्तमान में सिम आधार कार्ड से ही दी जा रही है और जो पुरानी सिम हे उसका आधार कार्ड लिंक सेवाप्रदाता के द्वारा ही किया जाता है जिसमे आपके फिंगरप्रिंट भी लिए जाते हे । अतः किसी भी फर्जी कॉल पे अपना गोपनीय जानकारी ना देवे । 

थार की बेटी का ऑल इंडिया थल सैनिक कैंप में चयन

थार में बसिया क्षेत्र के सिहडार गांव निवासी दुर्जन सिंह भाटी की पुत्री दिव्या सिंह भाटी का चयन ऑल इंडिया थल सैनिक कैंप में हुआ है । वह वहां राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेगी। 

गौरतलब है कि कन्याभ्रूण हत्या व बालिका शिक्षा के लिए बदनाम जैसलमेर के बसिया क्षेत्र में यह बदलाव के संकेत है । एक समय था जब यहाँ बेटीयो का अभाव था ,लोग बेटी होते ही मार देते थे ,लिंग भेदभाव यहाँ पुरजोर था वर्तमान विज्ञान के युग में यह क्षेत्र समय के साथ आगे बढ़ गया है इसका दिव्या सिंह प्रत्यक्ष उदाहरण हे। 

जहाँ लोग बेटीयो को गांव की स्कूल भेजने से कतराते हे वहां दिव्या अपने गांव से 400km दूर विद्यावाड़ी में पिछले 4 वर्षों से अध्यनरत हे और वहां ncc में यह मुकाम हासिल कर अपने गांव व जिले का गौरव बढ़ाया है |

सेना में ऑफिसर बनना है लक्ष्य- दिव्या का सपना इंडियन आर्मी में ऑफिसर बनना हे। जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत है ।